इंदौर (वनांचल न्यूज)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के समापन के बाद सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने प्रेस वार्ता में संगठन के विस्तार से लेकर सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि देश में अब 99 हजार 423 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं और संघ का काम 1 लाख 3 हजार 397 स्थानों तक पहुंच चुका है। शताब्दी वर्ष के दौरान करीब 5 करोड़ लोगों की भागीदारी वाले हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जबकि 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक संपर्क किया गया।

आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने युवाओं में नशे और ड्रग्स की बढ़ती लत पर चिंता जताते हुए कहा कि संघ सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के साथ मिलकर जागरूकता, काउंसलिंग और पुनर्वास के लिए अभियान की योजना बनाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण, SIR, Gen-Z के आंदोलन, सोशल मीडिया की अश्लील सामग्री, हिंदुत्व, संघ के पंजीयन, महिलाओं की भागीदारी, पर्यावरण और काशी-मथुरा जैसे धार्मिक मुद्दों पर भी सवालों के जवाब दिए।
00 देश में 99,423 शाखाएं, 1.03 लाख स्थानों तक पहुंचा संघ
दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि संघ की नियमित शाखाओं के विस्तार में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देश में शाखाएं संचालित होने वाले स्थानों की संख्या 63 हजार 208 हो गई है, जो पिछले अक्टूबर की तुलना में 8 हजार 156 अधिक है।
दैनिक शाखाएं: 99,423, पिछले वर्ष से 12,025 की वृद्धि।
साप्ताहिक मिलन: 34,982, लगभग 2,600 से अधिक की वृद्धि।
मासिक मंडली: 14,096, पिछले वर्ष से 463 अधिक।
संघ का कुल कार्य विस्तार: 1,03,397 स्थानों तक।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्थान पर एक से लेकर कई शाखाएं हो सकती हैं। इसलिए शाखाओं की संख्या और संघ के काम वाले स्थानों की संख्या अलग-अलग है। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने नए क्षेत्रों में एक सप्ताह से लेकर 10 दिन तक विशेष शाखाएं भी लगाईं। होसबोले के मुताबिक, इस दौरान 2 लाख से अधिक शाखाएं लगीं और एक लाख से ज्यादा नए स्थानों पर शाखा लगाने का प्रयास हुआ। हालांकि, इन अल्पकालिक शाखाओं को नियमित शाखाओं की संख्या में शामिल नहीं किया गया है।
00 65,664 हिंदू सम्मेलन, करीब 5 करोड़ लोगों की भागीदारी
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए होसबोले ने बताया कि देशभर में कुल 65 हजार 664 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 37 हजार 80 और शहरी बस्तियों में 28 हजार 584 सम्मेलन हुए। इन कार्यक्रमों में 3 लाख 8 हजार 449 गांवों की भागीदारी रही और कुल 4 करोड़ 93 लाख 76 हजार लोग शामिल हुए। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और अंडमान जैसे क्षेत्रों में भी सम्मेलन आयोजित किए गए। पोर्ट ब्लेयर में हुए कार्यक्रम में 5 हजार से अधिक लोग पहुंचे, जिनमें आसपास के 13 छोटे द्वीपों से आए लोग भी शामिल थे। होसबोले ने कहा कि इन सम्मेलनों में पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग, व्यसन से दूरी और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया गया।
00 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक पहुंचा संघ, युवाओं के लिए 57 हजार कार्यक्रम
संघ ने शताब्दी वर्ष में गृह संपर्क अभियान भी चलाया। इसके तहत 4 लाख 63 हजार 340 गांवों और शहरों की 41 हजार 825 बस्तियों में संपर्क किया गया। कुल 10 करोड़ 22 लाख 5 हजार 665 घरों तक स्वयंसेवक पहुंचे। होसबोले के अनुसार, 95 से 99 प्रतिशत लोगों ने इस संपर्क अभियान का स्वागत किया। देश के 59 हजार 8 मंडलों में से 54 हजार 937 मंडलों तक कार्यकर्ता पहुंचे। युवाओं को जोड़ने के लिए 57 हजार 243 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें कॉलेज विद्यार्थियों के 21 हजार 237 स्थानों और व्यवसायी युवाओं के 14 हजार 285 स्थानों पर कार्यक्रम हुए। इन आयोजनों में 31 लाख 26 हजार से अधिक कॉलेज विद्यार्थी और 6 लाख 90 हजार से अधिक व्यवसायी युवा शामिल हुए। इसके अलावा 3,207 प्रबुद्धजन गोष्ठियों में 4 लाख 29 हजार लोगों ने भाग लिया। सामाजिक सद्भाव के लिए 8,346 नगरों और 5,028 खंडों में बैठकें हुईं, जिनमें 3 लाख 79 हजार से अधिक सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
00 युवाओं में ड्रग्स की लत पर संघ चिंतित, जागरूकता-पुनर्वास की बनेगी योजना
प्रेस वार्ता का सबसे अहम मुद्दा युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं की लत रहा। होसबोले ने कहा कि कई वर्षों से यह समस्या देश के सामने है। ड्रग्स और नारकोटिक्स के अंतरराष्ट्रीय कारोबार तथा बड़े नेटवर्क पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं। संघ सामाजिक संगठन के रूप में इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम करेगा। इसके लिए नशे के खिलाफ काम कर रहे एनजीओ, सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों को साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल नशे के खिलाफ जागरूकता ही पर्याप्त नहीं है। जो युवा इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं, उनके लिए मानसिक काउंसलिंग, पुनर्वास और परिवारों की भूमिका पर भी काम करना होगा। इसी उद्देश्य से आगामी दिनों के लिए अभियान की रूपरेखा तैयार करने पर बैठक में चर्चा हुई।
00 46 प्रांतों की जगह अब 88 संभागों में बनेगी संगठनात्मक व्यवस्था
संघ अपनी संगठनात्मक संरचना में बदलाव करने जा रहा है। होसबोले ने बताया कि वर्तमान में संघ के 46 प्रांत हैं। नवंबर-दिसंबर में प्रांतों के संघचालकों का निर्वाचन और नई कार्यकारिणी की रचना होगी। इसके बाद देशभर में 88 संभागों के आधार पर संगठनात्मक काम की योजना बनेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नए पदों का निर्माण नहीं होगा, बल्कि संगठन की नई रचना होगी। संभाग स्तर पर संभाग संघचालक, संभाग कार्यवाह और संभाग प्रचारक जैसे दायित्व होंगे।
00 बाढ़ और चक्रवात में स्वयंसेवकों ने चलाए राहत अभियान
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संघ के सेवा कार्यों का ब्यौरा देते हुए होसबोले ने असम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, लखनऊ और चित्रकूट के उदाहरण दिए। असम के शिवसागर और जोरहाट में बाढ़ से 805 गांवों के 67 हजार 700 परिवार प्रभावित हुए। 1,500 से अधिक घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42 हजार 200 परिवारों तक भोजन, पानी और जरूरी सहायता पहुंचाई। करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक का सहयोग जुटाकर राहत और पुनर्वास के काम किए गए। लगभग 150 घरों के पुनर्निर्माण के लिए भी सामग्री उपलब्ध कराई गई। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली के खंभे खड़े करने, भोजन-पानी, रोशनी, मछुआरों को नाव और जाल उपलब्ध कराने तथा खारे पानी से प्रभावित कृषि भूमि की समस्या पर काम किया गया।
लखनऊ में बारिश से 40 हजार से अधिक परिवार प्रभावित हुए और 25 हजार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। यहां 300 से अधिक स्वयंसेवकों ने चार-पांच दिन तक सेवा कार्य किया। चित्रकूट में 28 गांवों के 2 हजार से अधिक परिवार प्रभावित हुए। 350 स्वयंसेवकों ने राहत कार्य किया और 6 हजार से अधिक लोगों तक भोजन-पानी पहुंचाया। करीब 5,600 लोगों को चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
00 Gen-Z के गुस्से को समझना जरूरी, लेकिन हिंसा और अराजकता का विरोध
देश में युवाओं के आंदोलनों और ‘रिजीम चेंज’ की चर्चा पर होसबोले ने कहा कि युवाओं की वास्तविक समस्याओं और आकांक्षाओं को समझना जरूरी है। युवाओं के सवालों को देशविरोधी मानना सही नहीं है। उनके साथ सकारात्मक संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं में अन्याय के खिलाफ आक्रोश हो सकता है और उसे समाज सुधार के लिए सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के लिए युवाओं का इस्तेमाल करना, हिंसा फैलाना और समाज को बांटने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता। होसबोले ने कहा कि देश के अंदर और बाहर की अराजक शक्तियां युवाओं को भड़काने का प्रयास कर सकती हैं। समाज के अच्छे लोगों को भी सक्रिय होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए। सज्जन शक्ति की संगठित आवाज अराजक शक्तियों को रोक सकती है।
00 सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट रोकने के लिए कानून से ज्यादा संस्कारों पर जोर
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री के सवाल पर होसबोले ने कहा कि तकनीक को पूरी तरह रोकना आसान नहीं है। कुछ देशों में बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल की उम्र और रात में इंटरनेट बंद करने जैसे प्रयास किए गए हैं। भारत में भी सरकार इस विषय पर निर्णय ले सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल कानून से ऐसी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। बच्चों को परिवार, स्कूल और समाज में संस्कार और जीवन मूल्य सिखाने होंगे। माता-पिता और शिक्षकों का व्यवहार बच्चों के लिए उदाहरण बनता है। उन्होंने परिवारों से अपील की कि दिन में कम से कम आधा घंटा या सप्ताह में एक घंटा मोबाइल से दूर रहकर परिवार के सभी सदस्य साथ बैठें और सकारात्मक विषयों पर बातचीत करें। मंदिरों और सामाजिक संस्थाओं को भी बच्चों को संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ना चाहिए।
00 आरक्षण समानता आने तक जारी रहना चाहिए, वोट बैंक की राजनीति न हो
आरक्षण की समीक्षा और इसे समाप्त करने की चर्चा पर होसबोले ने संघ का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक और शैक्षणिक भेदभाव के कारण पिछड़े वर्गों को दी गई आरक्षण व्यवस्था तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक समाज में वास्तविक समानता नहीं आ जाती। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ उन सभी पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें इसकी जरूरत है। यदि व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है तो लाभार्थियों की राय से सुधार किया जाना चाहिए। आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए है, इसे वोट बैंक की राजनीति का विषय नहीं बनाना चाहिए।
00 संघ का पंजीयन क्यों नहीं? होसबोले बोले- कानून में अनिवार्यता नहीं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल बाद भी पंजीकृत नहीं होने के सवाल पर होसबोले ने कहा कि देश का कानून संघ के लिए पंजीयन अनिवार्य नहीं करता। कई संगठन बिना पंजीयन के भी समाज के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संघ खुद को समाज से अलग संगठन के रूप में नहीं देखता, बल्कि समाज को संगठित करने का काम करता है। संघ का हर कार्य संविधान और कानून के अनुरूप होता है। तमिलनाडु में संघ के संचलन की अनुमति और कर्नाटक में हुए विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायालय ने भी संविधान के आधार पर संघ को अनुमति देने की बात कही है।
00 ‘हिंदू और हिंदुत्व अलग नहीं’, होसबोले ने दी अपनी परिभाषा
हिंदू और हिंदुत्व को अलग-अलग बताने वाले राजनीतिक बयानों पर होसबोले ने कहा कि ये शब्दों का खेल है। उनके मुताबिक, हिंदू के बिना हिंदुत्व की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने हिंदुत्व को ‘हिंदूनेस’ यानी हिंदू होने के भाव और गुणों के रूप में समझाया। जैसे मनुष्य के शरीर के साथ मनुष्यता भी जरूरी है, उसी तरह हिंदू पहचान के साथ हिंदुत्व के भाव जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना के समय डॉ. हेडगेवार ने भी समाज में हिंदुत्व के भाव जागृत करने पर जोर दिया था।
00 विदेशों में संघ का विस्तार नहीं, भारतीय विचारों का संवाद करने गए थे सरसंघचालक
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे पर होसबोले ने कहा कि संघ कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने नहीं जा रहा है। संघ के स्वयंसेवक दुनिया के 80 से 100 देशों में स्थानीय कानूनों के अनुसार हिंदू समुदाय के साथ काम करते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की सीमाओं के भीतर ही काम करता है। उन्होंने बताया कि भागवत के न्यूयॉर्क, लंदन और टोरंटो में कार्यक्रम हुए। वहां स्वामीनारायण मंदिर, खालसा गुरुद्वारा, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से संवाद हुआ। उद्देश्य भारत के विचार, वसुधैव कुटुंबकम, मानव एकता और संघ की कार्यपद्धति को समझाना था।
00 महिला सहभागिता पर भी चर्चा, नशे की समस्या युवतियों में भी
महिलाओं से जुड़े सवाल पर होसबोले ने कहा कि संघ के परिवार प्रबोधन और महिला समन्वय के कार्यक्रम लगातार चलते हैं। स्वयंसेवकों के परिवारों के मिलन और सामाजिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी रहती है। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के 95 प्रतिशत हिंदू सम्मेलनों में कोई न कोई महिला वक्ता रही। सामाजिक सद्भाव बैठकों में भी महिलाएं शामिल हुईं। उन्होंने चिंता जताई कि नशे की समस्या केवल युवकों तक सीमित नहीं है, कई जगह युवतियां भी इसकी चपेट में आ रही हैं। इसलिए महिलाओं को भी इन सामाजिक अभियानों से जोड़कर काम किया जाएगा।
00 पर्यावरण के लिए रोजमर्रा की आदतें बदलने पर जोर, हरित घर की योजना
पर्यावरण के सवाल पर होसबोले ने कहा कि संघ का जोर केवल सेमिनार और नीतिगत चर्चा तक सीमित नहीं है। आम लोगों को अपने दैनिक जीवन में पानी और बिजली बचाने, पॉलिथीन का उपयोग कम करने और पौधरोपण के साथ उनकी देखभाल करने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने ‘हरित घर’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि घरों में वर्षा जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और ऊर्जा बचत जैसे कुछ मानक अपनाने चाहिए। प्रयागराज कुंभ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि संघ ने देशभर से 14 लाख थालियां और करीब 15 लाख कपड़े की थैलियां एकत्र कर उपलब्ध कराईं, ताकि थर्मोकोल और प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम किया जा सके। दिल्ली में आगामी कार्यक्रम के दौरान एक बस्ती में 30 हजार पौधे लगाने का संकल्प भी लिया गया है।
00 पश्चिम बंगाल में डेढ़ सौ गुना बढ़ीं शाखाएं, सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचा संघ
शाखा विस्तार पर सवाल के जवाब में होसबोले ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले शाखा लगाने के दौरान विरोध होता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदली हैं और वहां शाखाओं की संख्या करीब डेढ़ सौ गुना बढ़ी है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के 48 खंडों में विशेष कार्यक्रम, मिजोरम में दो शाखाओं और लद्दाख में संघ की गतिविधियों का उल्लेख किया। केरल के 444 मंडलों में सभी गांवों तक शाखा पहुंचने की जानकारी भी दी। मेरठ, ब्रज और मालवा सहित कई क्षेत्रों में संगठन विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि 10 से 12 प्रांतों में 90 प्रतिशत तक क्षेत्र में संघ का काम पहुंच चुका है।
00 SIR पर संघ का समर्थन, बोले- मतदाता सूची से गलत नाम हटने चाहिए
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर होसबोले ने कहा कि मतदाता सूची का समय-समय पर शुद्धिकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि मृत व्यक्तियों के नाम, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम और भारत के नागरिक नहीं होने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं रहने चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के कार्यकाल में बिहार में हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उदाहरण दिया। होसबोले ने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटता है तो उसके पास चुनाव आयोग और अदालत में शिकायत करने का विकल्प मौजूद है। उनके मुताबिक, केवल राजनीतिक विरोध के लिए SIR का विरोध करना उचित नहीं है।
00 काशी-मथुरा पर संघ का रुख, हर मुद्दे पर आंदोलन जरूरी नहीं
काशी, मथुरा और ज्ञानवापी जैसे धार्मिक स्थलों को लेकर होसबोले ने कहा कि हर मुद्दे को एक ही तरीके से नहीं उठाया जा सकता। जिन मामलों में न्यायालय में सुनवाई चल रही है, उन्हें कानूनी प्रक्रिया से आगे बढ़ने देना चाहिए। हर विषय पर आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि काशी-मथुरा के विषय विश्व हिंदू परिषद और धर्माचार्य पहले ही उठा चुके हैं और वे अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। संघ फिलहाल इन मुद्दों पर कोई अलग आंदोलन करने की योजना नहीं बना रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन को उन्होंने अलग परिस्थितियों वाला विषय बताया। डॉ. राममनोहर लोहिया के मंदिरों के संरक्षण संबंधी विचारों का भी उल्लेख किया।
00 लक्ष्मणानंद सरस्वती, स्वामी श्रद्धानंद और राजनारायण बसु पर तीन वक्तव्य जारी
होसबोले ने बताया कि बैठक के दौरान तीन महापुरुषों के संदर्भ में वक्तव्य जारी किए गए। इनमें स्वामी श्रद्धानंद और लक्ष्मणानंद सरस्वती के कार्यों को याद किया गया। दोनों ने धार्मिक जागरूकता और समाज सेवा के लिए काम किया था। स्वामी श्रद्धानंद की 100 वर्ष पहले हत्या हुई थी, जबकि लक्ष्मणानंद सरस्वती की ओडिशा के कंधमाल में हत्या हुई थी। लक्ष्मणानंद सरस्वती ने जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक जागरूकता के काम किए थे। इसके साथ ही बंगाल के राजनारायण बसु की 200वीं जयंती के अवसर पर भी वक्तव्य जारी किया गया। उन्होंने नवगोपाल मित्र के साथ हिंदू मेले की शुरुआत की थी, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर सहित कई लोगों का समर्थन मिला था।
00 समाज के सहयोग के लिए जताया आभार
दत्तात्रेय होसबोले ने बैठक के आयोजन के लिए डेली कॉलेज प्रबंधन, ट्रस्टियों, देवास के राजपरिवार और पूर्व विद्यार्थियों का आभार जताया। उन्होंने मीडिया का भी धन्यवाद किया, जिसने पिछले एक सप्ताह में बैठक से जुड़े विषयों को समाज तक पहुंचाया। अंत में दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि संघ समाज के सहयोग से अपने कार्यों को आगे बढ़ाना चाहता है। इंदौर की इस बैठक से संघ ने संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता, नशे के खिलाफ अभियान और युवाओं से संवाद को आगामी कार्ययोजना के प्रमुख विषयों के रूप में सामने रखा। वहीं आरक्षण, SIR, हिंदुत्व और Gen-Z जैसे मुद्दों पर सरकार्यवाह के जवाबों ने संघ का राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण भी स्पष्ट किया।
