00 स्कूलों में छत्तीसगढ़ी पढ़ाने के संबंध में तय समय में निर्णय नहीं लेने का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

रायपुर (वनांचल न्यूज)। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई शुरू करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के पालन में देरी के आरोप पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला राज्य की राजभाषा छत्तीसगढ़ी को स्कूली शिक्षा में स्थान देने की मांग से जुड़ा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी शीतल पाटनवर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य के स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई शुरू कराने की मांग की थी। याचिका में छत्तीसगढ़ी को राज्य की राजभाषा बताते हुए नई शिक्षा नीति तथा संविधान के अनुच्छेद 350-क का उल्लेख किया गया था। इसमें बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
याचिकाकर्ता के अनुसार, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई शुरू करने के संबंध में तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। निर्धारित समयावधि में निर्णय नहीं होने का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दाखिल की। इसी मामले में न्यायालय ने स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता शीतल पाटनवर ने मांग की है कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सरकार पहली से 12वीं कक्षा तक छत्तीसगढ़ी भाषा की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा करे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
इस मामले पर राज्य आंदोलन मंच के संयोजक अनिल दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 26 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ी भाषा को उसका उचित अधिकार नहीं मिल पाया है। उन्होंने न्यायालय की कार्रवाई को संबंधित अधिकारियों के लिए चेतावनी बताते हुए भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
छत्तीसगढ़ी भाषा को स्कूलों में पढ़ाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। अब हाईकोर्ट द्वारा जारी अवमानना नोटिस के बाद इस मामले में राज्य सरकार के जवाब और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी।
