रायपुर (वनांचल न्यूज)। प्रदेश के आश्रम-छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बाल अधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 04 नवंबर को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री श्री रामविचार नेताम से सौजन्य भेंट कर छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार तथा बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस दौरान आयोग ने प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, एकलव्य, प्रयास एवं कन्या शिक्षा परिसरों सहित सभी आवासीय संस्थानों के संचालन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का प्रस्ताव रखा। मंत्री श्री नेताम ने आयोग द्वारा उठाए गए विषयों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र एवं ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए।

आयोग द्वारा प्रस्तावित SOP में बच्चों की आकस्मिक मृत्यु रोकने के लिए विशेष स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर दिया गया है। मलेरिया, डायरिया, पीलिया, सिकलसेल एवं सर्पदंश जैसी समस्याओं से बचाव के लिए प्रत्येक छात्रावास को निकटतम 24 घंटे संचालित स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) और 108 संजीवनी एक्सप्रेस से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही किसी भी बच्चे को बुखार आने पर 2 से 6 घंटे के भीतर रक्त जांच एवं आवश्यकता अनुसार अस्पताल रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है।
छात्रावासों के बेहतर संचालन के लिए अधीक्षकों का परिसर में ही रात्रि निवास अनिवार्य करने, मुख्यालय छोड़कर अप-डाउन करने पर रोक लगाने तथा रात 9 से 9:30 बजे के बीच जियो-फेंसिंग आधारित फेस अटेंडेंस लागू करने की अनुशंसा की गई है। साथ ही एक व्यक्ति को एक ही छात्रावास का प्रभार देने का सुझाव भी शामिल है। कन्या छात्रावासों में बालिकाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केवल महिला अधीक्षक, महिला रसोइया एवं महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती, पुरुषों के अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध तथा सभी प्रवेश द्वारों पर 30 दिनों के बैकअप वाले नाइट विजन CCTV कैमरे लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा बाल सुरक्षा नीति एवं शिकायत पेटी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
आयोग ने छात्रावासों में सुरक्षित आवासीय वातावरण के लिए मानसून से पहले भवनों का स्ट्रक्चरल एवं इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट, बाउंड्रीवॉल निर्माण और खिड़कियों में मच्छररोधी जाली लगाने की अनुशंसा की है। नए विद्यार्थियों के लिए 15 दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम एवं संगवारी-बडी सिस्टम शुरू करने तथा बच्चों में मानसिक तनाव, आत्महत्या की प्रवृत्ति और पढ़ाई बीच में छोड़ने जैसी समस्याओं की रोकथाम के लिए क्लस्टर स्तर पर मनोवैज्ञानिक काउंसलर नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है।
बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर प्रत्येक विद्यार्थी का ABHA ID से जुड़ा डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाने तथा सिकलसेल पॉजिटिव बच्चों को विशेष रेड कार्ड श्रेणी में रखकर नियमित उपचार एवं दवा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए महंगाई के अनुरूप भोजन भत्ता बढ़ाने और दैनिक आहार में रागी, कोदो-कुटकी जैसे स्थानीय पौष्टिक अनाज, अंडा, दूध, हरी सब्जियां एवं गुड़-चना शामिल करने का प्रस्ताव है। वहीं कन्या छात्रावासों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन, इंसिनरेटर तथा साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड (WIFS) की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
आयोग का उद्देश्य प्रदेश के सभी आश्रम-छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ, संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करना है, ताकि बच्चों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के साथ-साथ POCSO अधिनियम 2012 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।
