खुले गड्ढे बने मौत का जाल, आयोग ने नगरीय प्रशासन को भेजी सख्त अनुशंसा : डॉ. वर्णिका शर्मा की चेतावनी बोलीं बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल हों इंतजाम

00 बारिश में बढ़ा खतरा, 07 जुलाई तक रिपोर्ट मांगी

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टर व नगरीय निकायों के उच्चाधिकारियों को सख्त अनुशंसा भेजी है। आयोग ने कहा कि खुले गड्ढे बच्चों के लिए मौत का जाल बन रहे हैं और नगरीय प्रशासन बच्चों की सुरक्षा तत्काल सुनिश्चित करे।

आयोग के संज्ञान में ऐसे प्रकरण आए हैं जिनमें कॉलोनी में निर्माणाधीन गड्ढे खुले होने, सड़कों पर गड्ढे खुले होने अथवा बारिश में नालियों के ढक जाने के कारण उसमें बच्चे गिर गए और उनकी मृत्यु हो गई। आयोग ने इसे बेहद दुखद माना है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 तथा सहपठित धारा 15 के तहत बच्चों के जीवन के अधिकार की रक्षा को देखते हुए अनुशंसा क्रमांक आर-191/30.06.2026 जारी की है।

नगरीय क्षेत्र में तत्काल सर्वेक्षण अभियान चलाकर खुले गड्ढों, नालियों या निर्माणाधीन स्थलों को चिन्हांकित किया जाए। चिन्हांकित गड्ढों को या तो भरा जाए अथवा उनके चारों ओर सुरक्षा कवच के रूप में बल्ली आदि से बाड़ी लगा दी जाए जिससे बच्चे उसमें न गिर पाएं।

समस्त निर्माण एजेंसियों तथा आवासीय कॉलोनियों को निर्देश जारी किए जाएं कि नींव स्थल, कॉलम स्थल या अन्य कारणों से खोदे गए गड्ढों के चारों ओर सुरक्षा घेरा लगाकर बंद करें ताकि बच्चे आवाजाही करते समय न गिरें। संवेदनशील निर्माणाधीन स्थलों पर निर्माण एजेंसियां एक चौकीदार या सुरक्षाकर्मी भी तैनात करें जो बच्चों को जोखिम से बचाने में सहायक हो सके।

अनुशंसा में कहा गया है कि बारिश में खेलते समय या शाला आते जाते समय पैदल चलते बच्चों को छोटे या बड़े गड्ढों में अंतर समझ में नहीं आता और अनजाने में ही जान का खतरा उत्पन्न हो जाता है। अतः इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए मंत्रालय तथा विभागाध्यक्ष स्तर से पर्याप्त निर्देश प्रसारित किए जाएं।

जिला स्तर पर जिला कलेक्टर व नगरीय निकाय के उच्चाधिकारी इस विषय पर तत्काल पहल करें और इसे नियमित साप्ताहिक समय सीमा के पत्रों पर कार्यवाही की समीक्षा के विषय के रूप में शामिल किया जाए।

आयोग ने अनुशंसा पर कार्यवाही करते हुए निर्देश प्रसारित कर 07 जुलाई 2026 तक लिखित में अवगत कराने को कहा है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने चेतावनी दी कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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