आयोग के हस्तक्षेप से दो वर्षों से शिक्षा से वंचित बालिकाओं को मिला न्याय : विद्यालय ने माफ की फीस, दी 42 हजार की आर्थिक सहायता

00 विशेष खंडपीठ की सुनवाई में एक सप्ताह के भीतर हुआ समाधान

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित हस्तक्षेप से पिछले दो वर्षों से शिक्षा से वंचित दो बालिकाओं को न्याय मिला है। स्थानांतरण प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक औपचारिकताओं के लंबित रहने के कारण दोनों बालिकाओं का अन्य विद्यालय में प्रवेश नहीं हो पा रहा था।

आयोग को न्यूजपेपर और आवेदन के माध्यम से यह प्रकरण संज्ञान में आया। तथ्यों में सामने आया कि बालिकाओं के पिता ने आर्थिक तंगी की वजह से आत्महत्या कर ली थी तथा उनकी माता गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। पारिवारिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे अपनी दोनों पुत्रियों की शिक्षा अन्य स्थान पर जारी रखना चाहती थीं, किंतु आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण दो वर्षों से बालिकाएं शिक्षा से वंचित थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर विशेष खंडपीठ (फास्टट्रैक कोर्ट) का गठन कर प्रकरण की त्वरित सुनवाई की गई। आयोग ने दोनों पक्षों की बात संवेदनशीलता एवं गंभीरता से सुनी। बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आयोग ने आपसी सहमति से समाधान का प्रयास किया।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने संबंधित विद्यालय प्रबंधन को बालिकाओं के शिक्षा के अधिकार को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक पहल करने की सलाह दी। आयोग की पहल पर विद्यालय प्रबंधन ने दोनों छात्राओं का बकाया शुल्क पूर्णतः माफ करने, उनका परीक्षा परिणाम एवं स्थानांतरण प्रमाण-पत्र शीघ्र उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही नई जगह पर प्रवेश एवं शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दोनों बालिकाओं को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वेच्छा से प्रदान करने का निर्णय लिया गया, जो निर्धारित समयावधि में उनके परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी।

आवेदिका ने आयोग के समक्ष इस समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए सहमति प्रदान की, जिसके पश्चात आयोग ने प्रकरण का निराकरण कर उसे नस्तीबद्ध करने के निर्देश दिए। आयोग में 18 जून को प्रकरण दर्ज हुआ और 24 जून को यानी एक हफ्ते के भीतर इसका निराकरण हो गया।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा, “शिक्षा का अधिकार सर्वोपरि है। बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा तथा उनके सर्वोत्तम हितों का संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आयोग संवेदनशीलता, संवाद और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से ऐसे मामलों का मानवीय एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

आवेदिका ने आयोग की त्वरित कार्रवाई एवं संवेदनशील हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग के प्रयासों से उनकी दोनों पुत्रियों की शिक्षा दोबारा प्रारंभ हो सकेगी और उनका भविष्य सुरक्षित होगा।

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