छत्तीसगढ़ शासन का सर्वोच्च सम्मान राज्य अलंकरण सम्मान डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को मिला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के हाथों डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर का सम्मान

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्योत्सव में भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के करकमलों से छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग का सर्वोच्च सम्मान नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर को रंगमंचों में सदैव सक्रिय रहने, अभिनय, निर्देशन एवं प्रयोगकर्मी आयोजनों के लिए अभिनय कर कलात्मक प्रस्तुतियों के लिए हबीब तनवीर सम्मान से सादर विभूषित किया गया। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कलाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को रंगमंच पर विगत 48 वर्षों से सजीव रूप में प्रस्तुत करने वाले डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित लोक कलाकार, रंगकर्मी, नाटककार, निर्देशक एवं लोक संस्कृति के संवाहक हैं।आपका जन्म 25 जून 1971 को रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के छोटे से ग्राम बोड़रा में एक किसान परिवार में हुआ।आपकी माता श्रीमती कमला देवी एवं पिता श्री शत्रुहन लाल चन्द्राकर हैं। आपके पिता प्रसिद्ध लोक कलाकार, रामायण के टीकाकार, तबला वादक तथा अभिनय के सिद्धहस्त कलाकार हैं। पिता से प्राप्त कला-संस्कारों ने बचपन से ही आपके भीतर लोक कला, संगीत और रंगमंच के प्रति गहरी रुचि एवं समर्पण का भाव विकसित किया।

शिक्षा एवं शैक्षणिक उपलब्धियाँ

डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम बोड़रा में हुई। मिडिल स्कूल की शिक्षा आपने ग्राम पंचायत रसनी में प्राप्त की, जो आपके गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर है।हाई स्कूल एवं महाविद्यालयीन शिक्षा आरंग में पूर्ण करने के पश्चात आपने रायपुर से बी.एड. की पढ़ाई की।आपकी शैक्षणिक योग्यताओं में निम्नलिखित शामिल हैं—- एम.ए. — राजनीति शास्त्र- बी.एड. — रायपुर- डी.ई.एच.एम. — होम्योपैथी- पत्रकारिता- एम.एस.डब्ल्यू.- एल.एल.बी.- एम.ए. — मनोविज्ञान- एम.ए. — समाजशास्त्र, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर- एम.ए. — योग विज्ञान, रावतपुरा विश्वविद्यालय, धनेलीवर्तमान में आप बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों तथा बालगृहों के वैज्ञानिक अध्ययन पर पीएच.डी. हेतु शोधरत हैं।इसके अतिरिक्त, आपने राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत विधिवत लोक संगीत की शिक्षा प्राप्त की है।

कला-साधना एवं रंगमंचीय यात्रा

डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर बचपन से ही कला के प्रति समर्पित रहे हैं। गांव में आयोजित रामलीला, श्रीकृष्ण लीला, राजा हरिश्चंद्र एवं राजा मोरध्वज जैसे नाटकों में आपने बाल्यावस्था से ही छोटे-बड़े सभी प्रकार के पात्रों की भूमिकाएं निभाईं।गांव की नाचा पार्टी में आपने जनाना परी, सरपंच, गुरुजी, साहब एवं कोटवार जैसे विविध पात्रों का अभिनय किया।बचपन से ही आप अपने पिता के साथ रामायण मंडली में जाते रहे। संगीत एवं लोक कला के इसी वातावरण में आपने हारमोनियम, घुंघरू, डफली, मंजीरा, बैंजो एवं ऑर्गन जैसे वाद्ययंत्रों को बजाना सीखा। साथ ही गायन, अभिनय एवं रंगमंच के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। ठेठ छत्तीसगढ़ी भाषा डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर मंच पर ऐसी छत्तीसगढ़ी बोलते हैं कि हर गांव वाला खुद को उससे जुड़ा महसूस करता है “का हाल हे संगवारी हो” “जय जोहार” जैसे संवाद उनके मुंह से सुनना दर्शकों को बहुत पसंद है। *हंसी में संदेश* -उनका सबसे प्रसिद्ध अंदाज है हंसते हंसते सिखा देना। दहेज प्रथा, नशा मुक्ति, अंधविश्वास दूर करने, बेटी बेटा में कोई अंतर नहीं, शिक्षा का महत्व, बाल विवाह रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण, जल की बर्बादी को रोकने, पर्यावरण प्रदूषण, साफ सफाई स्वच्छता, साक्षरता, जैसे विषयों को वह कॉमेडी के माध्यम से लोगों के दिल में उतार देते हैं।

प्रमुख सम्मान एवं पुरस्कार लोक कला के संरक्षण, संवर्धन एवं रंगमंच के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान

सांस्कृतिक दूत अवार्डअंतरराष्ट्रीय गिरमिटिया महोत्सव, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में सम्मानित। लोक कला अवार्डनॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (नाचा) द्वारा प्रदान किया गया।विजनरी इंडिया अवार्डप्रसार भारती, आकाशवाणी, नई दिल्ली में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री पूनम ढिल्लों के करकमलों से सम्मानित।4. राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार15 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के कन्वेंशन सेंटर में रंगमंच के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित।छत्तीसगढ़ गौरव सम्मानवर्ष 2024 में भारत मंडपम, नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के करकमलों से सम्मानित।कला साधक सम्मानसंस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कार भारती, उत्तर प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव, झांसी में सम्मानित।रामदूत सम्मानअयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर सम्मानित। लोक कला संवाहक सम्मानविरासत महोत्सव, देहरादून में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के करकमलों से सम्मानित।स्वर्ण कला पदक सम्मानभारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के करकमलों से सम्मानित।लोक कला साधक सम्मानजवाहर कला केंद्र, जयपुर, राजस्थान में सम्मानित।कला शिरोमणि सम्मानराजभवन, मुंबई में तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस के करकमलों से रंगमंच में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित।रंगमंच सम्मानलोकमंथन, गुवाहाटी में अभिजीत गोखले के हाथों रंगमंच में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित।कला सम्मानपृथ्वी थिएटर, मुंबई में एकजुट थिएटर की निदेशक श्रीमती नादिरा राज बब्बर के करकमलों से रंगमंच के क्षेत्र में सतत सेवा के लिए सम्मानित। लोक कला संरक्षण सम्मानजनजातीय संग्रहालय, नई दिल्ली में लोक कला के संरक्षण हेतु उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित। कला रत्न सम्मानछत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका जी के करकमलों से सम्मानित हुए।तथा तत्कालीन राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके जी के करकमलों से सांस्कृतिक मंच एवं लोक कला के संवर्धन तथा संरक्षण के लिए सम्मानित।पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के करकमलों से रंग मंच में उत्कृष्ट कार्य के लिए कला रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।

निर्णायक एवं मूल्यांकनकर्ता के रूप में भूमिका

छत्तीसगढ़ की लोक कला से संबंधित विभिन्न प्रदेश स्तरीय एवं राष्ट्रीय कार्यक्रमों में आपको निर्णायक की भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त हुआ है।इस भूमिका के माध्यम से आपने लोक कला की गुणवत्ता, कलाकारों की प्रतिभा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के मूल्यांकन में योगदान दिया है।

दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में प्रसारण

डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर द्वारा अभिनीत एवं निर्देशित नाटकों तथा उनके गायन एवं संगीतबद्ध कार्यक्रमों का दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से नियमित प्रसारण होता रहा है।आपकी प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक संगीत एवं लोक संस्कृति को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं लोक संस्कृति का पाठ्यक्रम में समावेश

डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एस.सी.ई.आर.टी.) के माध्यम से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के कला विषय के पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो पाठ्यक्रम वर्तमान में कक्षा 1 से 8 तक कला विषय में चल रहा है।आपके प्रयासों से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से संबंधित निम्नलिखित विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में योगदान मिला—- लोक कला एवं लोक संस्कृति- पारंपरिक लोक खेलकूद- तीज-त्योहार- पारंपरिक खान-पान- पारंपरिक आभूषण एवं गहने- वेशभूषा- लोकगीत- लोक कलाकारों का परिचय एवं योगदानइस पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने एवं लोक परंपराओं के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया है। *संस्था की स्थापना एवं सांस्कृतिक गतिविधियां* डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर लोकरंजनी लोक कला सांस्कृतिक समिति, रायपुर के संस्थापक हैं।इस समिति के माध्यम से आप देशभर में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हुए छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक संगीत, लोकनाट्य एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्यशाला लेकर नया कलाकारों को रंगमंच की बारीकियां को सीखने एवं उन्हें मंच प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं।आपकी कला-साधना का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाना तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ना है।

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