संस्कार भारती रायपुर ने चित्रकार संघर्ष यदु को प्रदान किया ‘कला गुरु सम्मान

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। कला एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय संस्था संस्कार भारती रायपुर द्वारा रविवार को बूढ़ापारा स्थित परिसर में शहर के वरिष्ठ चित्रकार एवं कला शिक्षक संघर्ष यदु को उनके दीर्घकालीन कला साधना एवं कला शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘कला गुरु सम्मान’ से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मान से अलंकृत भारती बंधु रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शशांक शर्मा, अध्यक्ष, साहित्य परिषद, छत्तीसगढ़ शासन थे। इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार विजय बरठे एवं संस्कार भारती के उपाध्यक्ष माणिक विश्वकर्मा, प्रांत सह महामंत्री संस्कार भारती छत्तीसगढ़ डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर, डॉ. कमलभान सिंह चौहान सहित शहर के अनेक कला साधक एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ नटराज पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर कला गुरु सम्मान की परंपरा, भारतीय कला संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा तथा कला साधना में गुरु के महत्व पर मुख्य वक्ता शशांक शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय कला परंपरा में गुरु केवल कला की तकनीक सिखाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि साधक के भीतर संस्कार, अनुशासन और सृजनशीलता का विकास करने वाला मार्गदर्शक होता है।सम्मान समारोह में संघर्ष यदु को सम्मान-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उनकी कला साधना के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। यदु ने लंबे समय से चित्रकला के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अनेक कला विद्यार्थियों एवं नवोदित कलाकारों को प्रशिक्षण प्रदान किया है तथा कला के प्रति नई पीढ़ी में रुचि और संस्कार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कला साधकों द्वारा सांगीतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे समारोह में कला और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम का संचालन प्रीतेश पांडे ने किया।आभार प्रदर्शन डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर प्रांत सहमहामंत्री संस्कार भारती छत्तीसगढ़ प्रांत ने किया।इस अवसर पर महामंत्री कबीर चंद्राकर, रंजना गुरु, शैल दुलारी सारवा, पार्थ महावर, अरविंद यदु, रंजन मोढ़क, संतोष दिवाकर, संतोष चंद्राकर, डॉ. मुक्ति बैंस, भोजराज धनगर, सरिता वर्मा, ललित काकडे़, कीर्ति चंद्रा, टंकेश्वर चन्द्रा, कमल भंवर, शकुंतला साहू, कविता कुंदन वर्मा, चंद्रिका, प्रांजल राजपूत, सावित्री साहू, सान्वि साहू, सहित शहर के अनेक कला साधक एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।

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