दुर्ग (वनांचल न्यूज़)। स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार और मूल्यांकन पद्धति को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से, संचालक SCERT रायपुर के आदेशानुसार एवं प्राचार्य पी. सी. मरकले (डाइट अछोटी, दुर्ग) के मार्गदर्शन में दो दिवसीय विशेष ओरिएंटेशन प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया।सेठ रतनचंद सुराना महाविद्यालय, दुर्ग के सभागार में 06 एवं 07 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में दुर्ग और बालोद जिले के विषय विशेषज्ञों ने ‘ब्लूप्रिंट आधारित प्रश्न पत्र निर्माण’ की बारीकियों को सीखा।विशेषज्ञों का संगम और मार्गदर्शनप्रशिक्षण के नोडल अधिकारी सत्येन्द्र शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण शास्त्र (Pedagogy) और तार्किक मूल्यांकन पद्धति से लैस करना है। कार्यशाला में डाइट दुर्ग के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. शिशिरकना भट्टाचार्य, डॉ. नीलम दुबे, डॉ. वंदना सिंह एवं श्रीमती अनुजा मुरेकर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक आदर्श प्रश्न पत्र वही है जो रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर छात्र की ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ और ‘एनालिटिकल स्किल’ को परखे।व्यापक सहभागिता और विषय विस्तारइस कार्यशाला में बालोद जिले से 140 और दुर्ग जिले से 59 ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप (BRGs) के सदस्यों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का दायरा अत्यंत विस्तृत रहा, जिसमें निम्नलिखित संकायों पर गहन मंथन किया गया:विज्ञान समूह: गणित, जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान।कला समूह: राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र।वाणिज्य संकाय: लेखाशास्त्र एवं व्यवसाय अध्ययन।भाषा एवं अन्य: अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी, कृषि संकाय एवं पशुपालन।6 डोमेन पर आधारित गहन प्रशिक्षणकार्यशाला के तकनीकी सत्रों में राज्य एवं जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स (SRGs/DRGs) एच. एस. भुवाल, कोमल देशमुख, राजकुमार गेन्द्रे, श्रीमती रत्ना साहू, डॉ. पूनम बिचपुरिया, डॉ. अनुपमा मौर्य, विवेक धुर्वे, श्रीमती निभा रानी मधु, श्रीमती मृणालिनी पात्रेकर एवं डी. आर. साहू ने प्रभावी भूमिका निभाई।विशेषज्ञों ने ‘6 डोमेन’ (ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन) पर आधारित प्रश्न निर्माण की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में बताया गया कि कैसे ब्लूप्रिंट के माध्यम से पाठ्यक्रम के प्रत्येक हिस्से को उचित भार (Weightage) दिया जाए, ताकि परीक्षा का स्तर संतुलित रहे।प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं और लाभकठिन अवधारणाओं का सरलीकरण: वाणिज्य और विज्ञान जैसे विषयों में कठिन अध्यायों को सरल बनाकर उनसे प्रभावी प्रश्न पूछने की तकनीक साझा की गई।तार्किक एवं संतुलित प्रश्न पत्र: शिक्षकों को सिखाया गया कि प्रश्न पत्र न केवल छात्र की योग्यता मापें, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी पैदा करें।शिक्षण पद्धतियों का आदान-प्रदान: दोनों जिलों के शिक्षकों ने एक-दूसरे के अनुभवों से नवाचारी शिक्षण विधियों को साझा किया।प्राचार्य डाइट ने विश्वास व्यक्त किया है कि इस दो दिवसीय बौद्धिक मंथन से निकले निष्कर्ष आगामी बोर्ड परीक्षाओं और स्थानीय परीक्षाओं के परिणामों में मील का पत्थर साबित होंगे। शासन के निर्देशों के अनुरूप यह अनिवार्य प्रशिक्षण अब धरातल पर शिक्षकों के अध्यापन कौशल में सकारात्मक बदलाव लाएगा, जिससे अंततः प्रदेश के विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।
शैक्षणिक गुणवत्ता को नई धार: डाइट दुर्ग में ‘ब्लूप्रिंट एवं प्रश्न निर्माण’ कार्यशाला संपन्न
