बस्तर की आदिवासी कला को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पहचान
भोपाल/रायपुर (वनांचल न्यूज़)। आदिवासी कला, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए युवा शोधकर्ता, थिएटर आर्टिस्ट एवं सुरूज ट्रस्ट की संस्थापक दीप्ति ओगरे को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘ऊर्जस्विता सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान अनुनयन संस्था एवं मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भोपाल में आयोजित समारोह के दौरान दिया जाएगा।बस्तर अंचल की पारंपरिक गोदना (टैटू) कला, लोक आभूषण, चित्रकला एवं रंगमंच के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में दीप्ति ओगरे के सतत एवं समर्पित कार्यों को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। थिएटर, शोध एवं सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में उन्हें 11 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्ष 2021 से वे नारायणपुर, कोंडागांव एवं जगदलपुर जिलों में सक्रिय रहकर कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं सांस्कृतिक अभियानों के माध्यम से युवाओं और कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।इसी क्रम में भारत भवन, भोपाल में 9 से 11 जनवरी तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय लिटरेचर आर्ट फेस्टिवल में बस्तर की आदिवासी कलाओं का विशेष प्रतिनिधित्व किया जाएगा। फेस्टिवल में गोदना चित्रकला के लिए दीप्ति ओगरे, पारंपरिक आभूषण कला के लिए कोसी बारसे एवं कमली मरकाम (गुड़ियापदर) तथा गोदना कलाकार के रूप में ज्योति एवं सुकमन (जगदलपुर) का चयन किया गया है।उल्लेखनीय है कि दीप्ति ओगरे द्वारा सुरूज ट्रस्ट के माध्यम से बौद्धिक एवं दिव्यांग बच्चों हेतु चित्रकला कार्यशालाएं, पालकों के लिए परामर्श कार्यक्रम, कुपोषण के विरुद्ध जागरूकता अभियान, उच्च गुणवत्ता खाद्य सामग्री वितरण, सुरूज उत्सव सम्मान समारोह एवं ‘सुरता’ जैसे सांस्कृतिक आयोजनों का नियमित आयोजन किया जाता है। इन पहलों से समाज के उभरते युवा कलाकारों को सशक्त मंच मिल रहा है।बस्तर की कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से बस्तर ट्राइबल होमस्टे के संचालक शकील रिज़वी एवं हॉलिडेज़ इन रूरल इंडिया की संस्थापक सोफी हार्टमैन के सहयोग से होमस्टे में आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए नियमित कला प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इससे विलुप्त होती गोदना, पारंपरिक आभूषण एवं लोककला शैलियों को वैश्विक मंच पर पहचान मिल रही है।दीप्ति ओगरे पूर्व में बस्तर डांस, आर्ट एंड लिटरेचर (बादल एकेडमी, आसना) में सहायक प्रभारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है, जिसमें जेएनयू का बेस्ट पेपर अवॉर्ड भी शामिल है।दीप्ति ओगरे का यह सम्मान बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
