संस्कार भारती द्वारा छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में 51 चित्रों की चित्रमाला निर्माण कार्यशाला सम्पन्न

चित्रकारों ने रंगों से कराया ‘छत्तीसगढ़ दर्शन’ : संस्कार भारती छत्तीसगढ़

रायपुर (वनांचल न्यूज)। संस्कार भारती छत्तीसगढ़ द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में 51 चित्रों की एक भव्य चित्रमाला निर्माण कार्यशाला का आयोजन 11 और 12 अक्टूबर को विप्र भवन, समता कॉलोनी, रायपुर में किया गया।इस कार्यशाला में राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, राजनांदगांव, खैरागढ़, जांजगीर-चांपा, दुर्ग, बालोद, महासमुंद, दंतेवाड़ा, रायगढ़, धमतरी, बलौदाबाजार, बस्तर आदि जिलों से प्रतिभाशाली चित्रकारों ने भाग लेकर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, परंपरा और जनजीवन को चित्रों के माध्यम से सजीव किया।कार्यशाला के लिए विषय चयन छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा द्वारा किया गया, जिनमें राज्य की लोककला, संस्कृति, ऐतिहासिक घटनाएँ, सामाजिक जीवन, तीज-त्योहार और प्राकृतिक सौंदर्य को केंद्र में रखा गया।संस्कार भारती द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर शासन द्वारा 15 अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक रजत जयंती महोत्सव के अंतर्गत विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में संस्था ने यह चित्रकला कार्यशाला आयोजित की, जो अत्यंत सफल रही।कार्यशाला में निर्मित 51 चित्रों को प्रशासन को समर्पित कर यह अनुरोध किया जाएगा कि इनकी भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन 1 नवंबर को राज्योत्सव के अवसर पर किया जाए। संस्था द्वारा शीघ्र ही एक स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी, जिसमें सभी चित्रों के छायाचित्र और कलाकारों का विवरण सम्मिलित रहेगा।समापन समारोह में संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के प्रांतीय अध्यक्ष रिखी क्षत्री, डॉ. विकास चंद्रा विभाग, अध्यक्ष चित्रकला विभाग, संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ एवं शशांक शर्मा, अध्यक्ष साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ शासन, मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्था के महामंत्री हेमंत माहुलिकर, महानगर महामंत्री कबीर चंद्राकर, पुरुषोत्तम चंद्राकर, डॉ. आनंद पांडे, किशोर वैभव, प्रांजल राजपूत, प्रीतेश पांडे, लवकुश तिवारी, अपूर्वा, अंकित,रंजना गुरु, शैलदुलारी सारवा, सूर्यकांता कश्यप, पार्थ महावर सहित अनेक कला प्रेमी और नगरवासी उपस्थित थे।कार्यशाला में भाग लेने वाले चित्रकारों ने छत्तीसगढ़ की विविधता को अपने कैनवास पर साकार किया :- नेहल वैष्णव (खैरागढ़) – कला, संगीत एवं लैंडस्केप चित्र,दिव्या चंद्रा – राजिम त्रिवेणी संगम एवं राजीव लोचन मंदिर, मनहरण देवांगन – आदिवासी वेशभूषा,सोनल शर्मा – छत्तीसगढ़ महतारी, निकिता साहू – रामनामी संप्रदाय,खुशी चौधरी – राजा चक्रधर,शिवा साहू – ढोकरा कला,अवध कंवर – बस्तर बाजार,तृप्ति साव – छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक सौंदर्य, सिद्धार्थ सोनी – मड़ई एवं राउत नाचा, टिकेश्वर साहू – महादेव घाट,निलेश कश्यप – चित्रकोट जलप्रपात, लोकनृत्य,दिव्य प्रकाश – कर्मा नृत्य, सुमन महंत – वनभैंसा,अविरल कृष्ण साहू – भिलाई स्टील प्लांट, गिरीश दास – बस्तर दशहरा, प्रियांशु – बम्लेश्वरी मंदिर, दीपक शर्मा – शिवरीनारायण एवं तुरतुरिया वाल्मीकि आश्रम, अरविंद कुमार यदु – देवरी, सुआ नृत्य,दीपक प्रजापति – लोक पर्वों की झलक (हरेली, पोला, अक्ती), सुरेंद्र मेहर – जंगल सत्याग्रह, सोमनाथ कंवर – भोरमदेव मंदिर समूह,दिव्यांशु देवांगन – ग्रामीण जीवन दृश्य, अभिजीत बंगानी – नवा रायपुर लैंडस्केप, राहुल दत्ता – छत्तीसगढ़ की मूर्तिकला, करण कुमार – गौर नृत्य एवं घोटूल, विक्रांत चंचल साहू – पंथी नृत्य, गिरौदपुरी, गुरु घासीदास, सुजल गुप्ता – हसदेव बाँगो बांध लैंडस्केप,भावना – कृषि व किसान जीवन,कौशांक नाग – स्वास्थ्य एवं एम्स लैंडस्केप, मितलेश बारीक – रायपुर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, मुकेश कुंजाम – गोंड आदिवासी महिला, मनीषा धुर्वे – सीता डोंगरा व मेघदूत संदर्भ, रचना मरकाम – कोसा वस्त्र बुनाई, कौशल सिन्हा – माधवराव सप्रे, पेंड्रा, छत्तीसगढ़ मित्र समाचार, घनश्याम मानिकपुरी – दामाखेड़ा मेला, कबीरपंथ, सलवम मनीष – वन्यजीव (वनभैंसा, पहाड़ी मैना), शुभम – वीर नारायण सिंह,सुमन भंडारी – शिक्षा विषयक ग्रामीण चित्रण।इन सभी कलाकारों ने अपने रंगों और रेखाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आत्मा को साकार किया।

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