विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ के विशेषांक “समरस छत्तीसगढ़” का विमोचन

हर व्यक्ति के आचरण में सामाजिक समरसता आवश्यक :रामदत्त चक्रधर

रायपुर (वनांचल न्यूज़)।विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित विशेषांक “समरस छत्तीसगढ़” का विमोचन शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यालय जागृति मंडल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर रहे, जबकि अध्यक्षता प्रांत संघचालक माननीय डॉ. टोपलाल वर्मा ने की।इस अवसर पर रामदत्त चक्रधर ने कहा कि भारत का समाज जीवन अत्यंत प्राचीन है और समय के साथ उसने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। समाज जब एकरस और समरस होता है, तभी वह उन्नति की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि शरीर के सभी अंग भले ही अलग-अलग कार्य करते हों, किंतु उनमें एक ही रस प्रवाहित होता है। इसी प्रकार समाज में भी परस्पर समरसता आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भारतीय ग्रंथों में कहीं भी विषमता और शोषण का समर्थन नहीं मिलता। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी सामाजिक समानता और समरसता पर बल दिया है। विदेशी आक्रांताओं के शासनकाल में समाज को विभाजित करने के प्रयास हुए, किंतु भारतीय समाज ने अपनी संस्कृति और धर्म को नहीं छोड़ा। रामदत्त चक्रधर ने संत रविदास, वीर सावरकर, पं. मदन मोहन मालवीय सहित अनेक समाज सुधारकों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से समाज में समरसता की भावना मजबूत हुई है। उन्होंने पूज्य बाबा गुरु घासीदास के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को आज के समय में और अधिक प्रासंगिक बताया।उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में सामाजिक समरसता के वातावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर दोनों ने संघ की कार्यपद्धति और समरसता के भाव की सराहना की थी।

कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक श्री अभय राम, प्रांत प्रचार प्रमुख संजय तिवारी, रायपुर महानगर संघचालक महेश बिड़ला, सह प्रांत प्रचार प्रमुख नीरज सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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