सांसद महुआ मोइत्रा पर रायपुर पुलिस ने दर्ज की FIR : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिया था विवादित बयान

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर रायपुर पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन गया है। महुआ मोइत्रा का जवाब: “मुहावरे बेवकूफों के लिए नहीं होते” एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया।

वीडियो की शुरुआत उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को “सम्माननीय” कहकर की और कहा कि उनके बयान को गलत अर्थों में पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने बंगाली भाषा का एक पारंपरिक मुहावरा इस्तेमाल किया था, जिसका शाब्दिक अनुवाद कर जानबूझकर उसे भ्रामक अर्थ दिया गया। महुआ मोइत्रा ने कहा “मुहावरे बेवकूफों के लिए नहीं होते। विरोधी मुझे बार-बार घेरने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार अदालत और जनता के सामने सच सामने आ जाता है।” उन्होंने रायपुर पुलिस को निशाने पर लेते हुए लिखा, “पिछली बार हाईकोर्ट की फटकार के बाद आपने मुकदमा वापस ले लिया था। भाजपा के आकाओं की सुनना बंद करो, वरना बदनामी ही हाथ लगेगी।”

FIR किसने दर्ज कराई?

रायपुर के माना इलाके में रहने वाले गोपाल सामंतों ने मोइत्रा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सांसद ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है, जिससे आमजन की भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायत के आधार पर रायपुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 197 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और बयानबाजी की सच्चाई को परखा जाएगा।

विवादित टिप्पणी क्या थी?

महुआ मोइत्रा ने अपने एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने में विफल रहे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का “400 पार” का चुनावी नारा 2024 लोकसभा चुनावों में धराशायी हो गया। अपने तर्क को मजबूत करने के लिए महुआ ने बंगाली कहावत “लज्जाय माथा काटा जावा” का उदाहरण दिया, जिसका शाब्दिक अर्थ है – “शर्म से सिर कट जाना”। महुआ का कहना है कि यह कहावत बंगाल में जिम्मेदारी पूरी न कर पाने पर गहरी शर्मिंदगी व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। लेकिन भाजपा नेताओं का आरोप है कि महुआ ने जानबूझकर इस कहावत का गलत और आपत्तिजनक प्रयोग किया ताकि गृह मंत्री अमित शाह की छवि धूमिल की जा सके।

महुआ का सीधा हमला भाजपा और पुलिस पर

महुआ मोइत्रा ने ट्विटर (एक्स) और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार भाजपा और पुलिस पर हमला बोला। उन्होंने लिखा कि फर्जी मुकदमे दर्ज करना भाजपा की आदत बन चुकी है। अदालतें ऐसे मामलों को पहचान लेती हैं और अंततः भाजपा को ही शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। “फर्जी मुकदमों से बचें, अदालतें इन्हें पहचान लेती हैं और बाद में सिर झुकाना पड़ता है।” – महुआ मोइत्रा

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

महुआ मोइत्रा के बयान और FIR पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य के वित्त मंत्री और भाजपा नेता ओपी चौधरी ने कहा कि इंडिया गठबंधन बौखलाहट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की हताशा को दर्शाता है।

वित्त मंत्री पी चौधरी ने कहा, “विपक्ष को जनता ने नकार दिया है, अब ये केवल बयानबाजी और अपशब्दों की राजनीति कर रहे हैं। लेकिन जनता सब देख रही है और 2029 में भी भाजपा को ही समर्थन मिलेगा।” दूसरी ओर, कांग्रेस और टीएमसी के नेताओं ने महुआ के समर्थन में आवाज उठाई। उनका कहना है कि भाजपा विपक्षी नेताओं को डराने और चुप कराने के लिए पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है।

सोशल मीडिया पर गरमाहट

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा है। भाजपा समर्थक उपयोगकर्ता महुआ मोइत्रा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों के समर्थक इसे “फ्री स्पीच” पर हमला बता रहे हैं। महुआ का वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहती हैं कि भाजपा उनके खिलाफ मुकदमों का सहारा लेकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।

कानूनी पहलू

कानूनी जानकारों का कहना है कि बंगाली कहावत का शाब्दिक अनुवाद कर उसे “आपत्तिजनक” बताना मुश्किल होगा। अदालत में यह साबित करना होगा कि महुआ का इरादा गृह मंत्री की मानहानि करना था या यह केवल सांस्कृतिक संदर्भ में कहा गया था। पहले भी महुआ मोइत्रा के खिलाफ कई राज्यों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिलती रही है। रायपुर की इस एफआईआर का कानूनी अंजाम क्या होगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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