विशेष लेख :- श्रीमती सुप्रिया शर्मा (शिक्षिका)

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि’ एक अत्यंत सरस, भव्य एवं सफल आयोजन के रूप में संपन्न हुआ। यह उत्सव न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना, बल्कि आम जनमानस को पुस्तकों और सृजनात्मक विचारों के और निकट लाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।
आज की व्यस्त जीवनशैली में जहां नियमित पठन-पाठन के लिए समय निकाल पाना कठिन हो गया है, वहीं इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन हमें पुस्तकों की दुनिया से पुनः जोड़ने का कार्य करते हैं। रायपुर साहित्य उत्सव में सहभागिता करते हुए पाठकों को विविध विषयों पर आधारित ज्ञानवर्धक एवं रोचक पुस्तकों से रूबरू होने का अवसर मिला। अनेक नई पुस्तकें पाठकों की मेज तक पहुँचीं और उनके नियमित अध्ययन की प्रेरणा बनीं।
पुस्तकें जीवन का वह अनमोल उपहार हैं, जो मन को शांत, एकाग्र एवं परिपक्व बनाती हैं। जीवन की जटिलताओं, संघर्षों, समरसता और सफलता की राह को पुस्तकें सरल और अर्थपूर्ण बनाती हैं। संवेदनाओं का सागर कही जाने वाली ये पुस्तकें मानव जीवन को संबल प्रदान करती हैं तथा हर कौशल और हुनर के द्वार स्वतः खोल देती हैं। अच्छी पुस्तकों का सान्निध्य सदैव व्यक्ति को सन्मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
उत्सव के दौरान विभिन्न साहित्यिक विधाओं पर चर्चा-परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें स्थापित रचनाकारों के साथ-साथ नवोदित लेखकों और कवियों को भी मंच मिला। इस समागम ने साहित्यिक संवाद को समृद्ध किया और नव रचनाकारों को सृजन के लिए नई ऊर्जा प्रदान की। बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों—सभी वर्गों ने उत्साहपूर्वक इस आयोजन में भाग लिया। निस्संदेह, प्रतिभागियों में से अनेक के अंतर्मन में साहित्य का बीज अंकुरित हुआ होगा।
कला और संस्कृति के विविध रंगों ने इस उत्सव को और भी जीवंत बना दिया। साहित्य, कला और संस्कृति के इस संगम ने कार्यक्रम की गरिमा और प्रभावशीलता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। साहित्य भले ही एकांत में सृजित होता हो, पर उसका प्रभाव सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। समाज के प्रत्येक पहलू का प्रतिबिंब साहित्य में निहित होता है, जो समाज को सुदृढ़ और संवेदनशील बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रायपुर वासियों के लिए यह साहित्य उत्सव गौरव का विषय है। ‘आदि से अनादि’ साहित्य की वह सरिता है, जो मानव मन को सामाजिक, सकारात्मक और निर्मल दिशा प्रदान करती रहे। आशा है कि यह साहित्यिक प्रवाह निरंतर और सार्थक रूप से आगे बढ़ता रहेगा।
-सुप्रिया शर्मा, रायपुर
