रायपुर (वनांचल न्यूज़)।छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा की जा रही धान खरीदी इस वर्ष शुरुआत से ही भारी अव्यवस्था का शिकार रही है। किसान लगातार अपनी उपज बेचने के लिए परेशान है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया।कभी टोकन जारी नहीं होना, कभी खरीदी सीमा (लिमिट) कम करना, तो कभी खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था—इन सभी कारणों से किसान महीनों से भटकने को मजबूर है।यह भी चिंतनीय है कि धान खरीदी की प्रक्रिया को सुगम करने का प्रयास करने की बजाय, शासन के दिशा निर्देश किसानों की सत्यनिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए प्रतीत होते हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि धान खरीदी सत्र समाप्त होने में अब केवल 15 दिन शेष हैं, जबकि अब तक मात्र लगभग 60 प्रतिशत धान की ही खरीदी हो पाई है।यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है। खेतों में मेहनत कर धान पैदा करने वाला किसान आज अपने ही धान को बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है।इस गंभीर स्थिति को लेकर भारतीय किसान संघ ने 16 जनवरी को छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में आंदोलन करने का निर्णय लिया है।इस दौरान किसान प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे और सरकार से तत्काल सभी किसानों को टोकन उपलब्ध कराने, खरीदी लिमिट बढ़ाने, धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने तथा खरीदी व्यवस्था को सुचारु करनेकी मांग करेंगे।भारतीय किसान संघ कहना है कि सरकार किसानों के मध्य अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है और यह बात सभी को समझ आ चुकी है की सरकार कम से कम धान खरीदी करना चाहती है। किसान संघ का किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
धान खरीदी की अव्यवस्था के खिलाफ 16 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों में “आंदोलन”
