00 बाल आयोग की समीक्षा बैठक में बाल श्रमिकों को समय पर आर्थिक सहायता और कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश
रायपुर (वनांचल न्यूज)। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को आयोग कार्यालय में बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रम विभाग के उप श्रम आयुक्त, सहायक श्रम अधिकारी एवं एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर उपस्थित थे।
बैठक में बाल श्रम के मामलों में त्वरित बचाव, प्रभावी विधिक कार्रवाई, विभागीय समन्वय तथा बाल श्रमिकों के समग्र पुनर्वास पर विस्तृत चर्चा हुई।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देश दिए कि रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बाल श्रमिक को अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुरूप उनके संरक्षण, देखरेख एवं पुनर्वास की विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि अब बाल श्रमिकों के रेस्क्यू के बाद कार्रवाई केवल बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम, 1986 तक सीमित नहीं रहेगी। प्रकरण की प्रकृति के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय अधिनियम, 2015, बंधुआ मजदूरी प्रणाली उन्मूलन अधिनियम, 1976 एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत भी तत्काल एफआईआर दर्ज कर प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
समीक्षा में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को शासन द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता एवं क्षतिपूर्ति राशि के वितरण में अत्यधिक विलंब हो रहा है। इस पर डॉ. शर्मा ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सहायता में देरी बच्चों के प्रभावी पुनर्वास में बाधा बनती है। उन्होंने प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाते हुए पात्र प्रत्येक बाल श्रमिक को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर बल दिया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत बालकों के नियोजन पर पूर्ण प्रतिबंध है। धारा 14 एवं 14-बी के तहत दोषी नियोजकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही प्रत्येक जिले में गठित बाल श्रम टास्क फोर्स एवं बंधुआ मजदूर सतर्कता समिति के बीच प्रभावी समन्वय कर संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। गृह विभाग, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।
डॉ. शर्मा ने कहा कि बाल श्रमिकों का पुनर्वास केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित न रहकर उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की समग्र प्रक्रिया के रूप में किया जाए।
बैठक में यह भी तय हुआ कि प्रत्येक जिले में पदस्थ श्रम अधिकारियों एवं श्रम निरीक्षकों के लिए बाल श्रमिकों के बचाव, विधिक कार्रवाई एवं पुनर्वास संबंधी दायित्वों पर विशेष प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और अनुपालन रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक के अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि आयोग बाल श्रम के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के साथ कार्य कर रहा है। किसी भी बच्चे का बचपन श्रम की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। बाल श्रम कराने वाले प्रत्येक दोषी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी और प्रत्येक मुक्त कराए गए बच्चे के सुरक्षित एवं शिक्षित भविष्य के लिए सभी विभागों को समन्वित होकर कार्य करना होगा।
