जगदलपुर (वनांचल न्यूज़)। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने जगदलपुर प्रवास के दौरान फोस्टर केयर व्यवस्था का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया और सुरक्षित पारिवारिक वातावरण में रह रहे बच्चों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद और उनकी व्यक्तिगत रुचियों पर विस्तार से संवाद किया।

फोस्टर केयर व्यवस्था उन बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है जो किसी कारणवश अपने माता-पिता के साथ नहीं रह पाते। ऐसे बच्चों को अस्थायी रूप से वैकल्पिक परिवार में सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है, जहां उनकी देखभाल, शिक्षा और समग्र विकास सुनिश्चित किया जाता है। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों को संस्था में रखने की अपेक्षा सुरक्षित पारिवारिक वातावरण सर्वोत्तम विकल्प है।
अध्यक्ष ने बाबूसेरा और कलचा जैसे दूरस्थ गांवों में फोस्टर परिवारों से भेंट कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण में पाया गया कि फोस्टर केयर का क्रियान्वयन संतोषजनक रूप से किया जा रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के एक परिवार के तीन बालकों ने भविष्य में भारतीय सेना में सेवा देने की इच्छा व्यक्त की, जो उनके भीतर पनप रहे आत्मविश्वास और सकारात्मक वातावरण को दर्शाता है।
एक बालिका, जो पूर्व में दुर्ग बालिका गृह और राजनांदगांव में फोस्टर देखरेख में रही थी, वर्तमान में कलचा के परिवार में पूरी तरह समाहित हो चुकी है। वह स्थानीय भाषाएं ‘भतरी’ और ‘हलबी’ सीख चुकी है तथा संस्कृत विषय में विशेष रुचि रखती है।
निरीक्षण के दौरान यह भी सुझाव सामने आया कि फोस्टर के समय बच्चों के शैक्षणिक सत्र का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इस संबंध में आयोग द्वारा शीघ्र ही अनुशंसा जारी की जाएगी।
जगदलपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में खेल सुविधाओं के विस्तार, स्टेडियम निर्माण तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में संबंधित विभागीय अधिकारी, बाल संरक्षण इकाई के सदस्य, यूनिसेफ प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आयोग द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फोस्टर केयर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहमय पारिवारिक वातावरण मिल सके और उनके सपनों को नई उड़ान मिलती रहे।
