विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक अनियमितताओं एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर अभाविप ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जुड़े गंभीर प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं में उत्पन्न अनियमितताओं को लेकर महामहिम राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में भेंट कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश संगठन मंत्री महेश साकेत, प्रदेश मंत्री अनंत सोनी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य यज्ञदत्त वर्मा, प्रदेश सह मंत्री प्रथम राव फुटाने एवं रायपुर महानगर मंत्री  सुजल गुप्ता उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण विषयों पर रखी गई चिंताएं

महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, पाटन (दुर्ग) में कुलसचिव पद को लेकर उत्पन्न असमंजस की स्थिति पर अभाविप ने चिंता व्यक्त की। परिषद ने बताया कि एक ही समय में दो अधिकारियों की कुलसचिव के रूप में नियुक्ति से विश्वविद्यालय प्रशासन प्रभावित हो रहा है। इस विषय में स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता बताई गई।

लोकभवन द्वारा जारी निर्देशों को लेकर भी अभाविप ने अपना अभिमत रखा। परिषद का कहना है कि हालिया पत्राचार से विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध महाविद्यालयों के कर्मचारियों के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे उच्च शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन एवं जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

लंबित जांचों एवं नियुक्तियों पर सवाल

अभाविप ने छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई के पूर्व कुलपति प्रो. एम. के. वर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की लंबित जांच पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। परिषद ने कहा कि गठित जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं होना गंभीर विषय है।

इसके साथ ही इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में कुलपति की नियुक्ति को लेकर भी परिषद ने पुनर्विचार की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि नियुक्त कुलपति पर पूर्व में भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक कुप्रबंधन के आरोप रहे हैं, जिन्हें नियुक्ति के समय समुचित रूप से नहीं परखा गया। विश्वविद्यालय की गरिमा, शुचिता एवं छात्रहित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई।

उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभाविप की चिंता

प्रदेश मंत्री अनंत सोनी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। कई विश्वविद्यालयों में आज भी स्थायी कुलपति एवं कुलसचिव नियुक्त नहीं हैं। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शी एवं त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया |राज्यपाल रमेन डेका ने प्रतिनिधि मंडल द्वारा प्रस्तुत सभी विषयों को गंभीरतापूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि छात्रहित एवं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सभी बिंदुओं पर प्राथमिकता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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