रायपुर (वनांचल न्यूज़) | छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल द्वारा फार्मासिस्ट अभिषेक चंदा का रजिस्ट्रेशन बिना विधिक एवं नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किए रद्द किया जाना अत्यंत चिंताजनक एवं निंदनीय है। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, काउंसिल के उपाध्यक्ष राहुल तिवारी, अध्यक्ष अरुण मिश्रा एवं रजिस्ट्रार अश्वनी गुरुद्वेकर ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए जांच समिति की प्रक्रिया को प्रभावित किया, जबकि अनेक बिंदुओं पर उपाध्यक्ष स्वयं जांच के दायरे में आते थे तथा वह रजिस्ट्रार नियम को अपने से ऊपर रखा।फार्मेसी एक्ट एवं काउंसिल के उपबंधों की जहाँ स्पष्ट रूप से अवहेलना की गई, वहीं एक निर्दोष विद्यार्थी और फार्मासिस्ट का भविष्य बिना उचित सुनवाई, पारदर्शी प्रक्रिया एवं ठोस आधार के नष्ट कर दिया गया।यह कार्रवाई पूरे फार्मेसी समुदाय के बीच गंभीर असंतोष का कारण बनी है।
राज्य के अनेक शिक्षाविद, फार्मेसी विशेषज्ञ, तथा काउंसिल के ही कई सदस्य इस निर्णय से सहमत नहीं हैं और उन्होंने इस कार्यवाही को एकतरफा तथा न्यायविरुद्ध बताया है।नेशनल फार्मासिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के योगेश साहू एवं संगठन के सभी सदस्यों ने भी इस कृत्य पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि—जिस प्रकार से रजिस्ट्रार, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का मनमानी काउंसिल में चल रहा है,वह स्वीकार्य नहीं हो सकता है।
संगठन यह मांग करता है कि—1. इस प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। 2. जिन पदाधिकारियों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया, उन पर शासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाए। 3. अभिषेक चंदा का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। 4. भविष्य में ऐसी मनमानी रोकने हेतु पारदर्शी प्रक्रिया एवं जवाबदेही प्रणाली लागू की जाए।
नेशनल फार्मासिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगा।
