वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगाठ पर मुस्लिम समाज द्वारा छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड में राष्ट्रीय गीत का सामुहिक गायन

रायपुर (वनांचल न्यूज़)। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राष्ट्र गीत वंदे मातरम को 150 वर्ष पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड में सामुहिक राष्ट्र गीत गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के माननीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष/वंदे मातरम् कार्यक्रम के प्रदेश प्रभारी, नंदन लाल जैन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। श्री श्याम बिहारी जायसवाल जी ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना की थी, इस ऐतिहासिक गीत को प्रथम स्वर सन् 1896 में रविन्द्रनाथ टैगोर ने की थी, इस गीत का गायन कर हम देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुती देने वाले शहीदों को नमन करते हैं। श्री नंदन जैन जी ने कहा कि, वंदे मातरम गीत का ही जोश था जो देश की आजादी के लिए श्री अशफाक उल्ला खान और अनेकों ने शहीद होकर देश को आजादी दिलाई और आज हम आजाद भारत में साथ रह रहे हैं, आज हम वंदे मातरम गाकर शहीद अशफाक उल्ला खान जी को नमन करेंगें जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित किया। डाॅ.सलीम राज ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि देश के मान, सम्मान, अभिमान का प्रतीक है देश की आजादी में सभी समुदाय में जोश उत्पन्न करने वाला राष्ट्रीय गीत है, वंदे मातरम भारत की आत्मा, आत्म निर्भर भारत स्वदेशी संकल्प का प्रतीक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर काजी मौलाना मुफ्ती आरिफ अली फारूकी ने की। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन श्रीमति रेहाना खान ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से समाज प्रमुख हाजी अब्दुल फहीम, मखमूर इकबाल खान, युनूस कुरैशी, मौलाना आबाद फारूकी, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिम्मी नाहिद, लेखा अधिकारी पवन कुमार, विधि अधिकारी एस.के.पांडेय, कार्यालयीन समस्त अधिकारी व कर्मचारी, मौलाना कारी समद, तेलीबांधा मदरसा के मौलाना सलाम, गुलाम रसूल, सैयद मोहम्मद अली, ईदगाहभाटा मस्जिद कमेटी पदाधिकारी, जामा मस्जिद बैरन बाजार कमेटी के पदाधिकारी, दरगाह सैयद शेर अली आगा कमेटी के पदाधिकारी, दरगाह हजरत बुरहान शाह के खादिम व पदाधिकारी, हाजी अनवर रिजवी, आबिदा बेगम, फिरोज मेमन, जमील कुरैशी, गुलाम गौस खान, इकबाल हक, फैजान अहमद, यूसुफ हुसैन, जीशान सिद्दीकी, हाजी प्यारे खान, रिजवान अहमद, मोनिस रजा, सैयद रजा, अली मैमुन, जियाउद्दीन, शेख हमीद, फरहान काजी, हाजी असलम, असलम शाह, राजा महबूब, सलाम खान व मुस्लिम समाज के गणमान्य नागरिक व महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

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